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अपना ब्लड प्रेशर नंबर जानें, ताकि हाइपर टेंशन से बचाव हो मुमकिन: डॉ राजेश अग्रवाल
इंदौर. हाइ ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) या हाइपर टेंशन को ’साइलेंट किलर‘ कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षण दिखायी नहीं देते लेकिन इसकी वजह से कार्डियोवास्क्युलर रोग या अन्य जटिलताएं पैदा हो सकती हैं, और यहां तक कि मृत्यु भी हो सकती है।
यही वजह है कि 17 मई को हर साल ’विश्व उच्च रक्त चाप दिवस‘ के रूप में मनाया जाता है और मई को ’उच्च रक्त चाप शिक्षा/जागरूकता माह‘ के तौर पर मनाया जाता है ताकि लोगों को अपना ब्लड प्रेशर जांचने की प्रेरणा मिल सके।
इस वर्श विश्व उच्च रक्त चाप दिवस का विशय ’अपना नंबर जानें‘ चुना गया। ब्लड प्रेशर की जांच आसानी से डॉक्टर से करायी जा सकती है और हाइपरटेंशन का पता चलते ही आपके डॉक्टर आवश्यक इलाज तथा इसे नियंत्रित रखने के लिए जीवन शैली में बदलाव के बारे में आपको जानकारी दे सकते हैं।
इस बारे में डॉ राजेश अग्रवाल, एमडी मेडिसिन एंड डायबिटोलॉजिस्ट, ने कहा, ’’जैसे आप अपनी गाड़ी के टायरों में नियमित रूप से हवा की जांच करवाते हैं, उसी तरह से आपको अपना ब्लड प्रेशर भी नियमित जांचना चाहिए। कई बार, हाइ ब्लड प्रेशर से पीड़ित व्यक्ति में कोई बाहरी लक्षण तब तक दिखायी नहीं देता जब तक उसका स्तर काफी अधिक न हो। यही कारण है कि मैं 30 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों को नियमित तौर पर अपना ब्लड प्रेशर जांच करवाने की सलाह देता हूं।
मेरा अनुभव है कि हर परिवार में कम से कम एक व्यक्ति का ब्लडप्रेशर जरूर अधिक होता है। इसलिए मैं परिवार के सभी वयस्क सदस्यों को घर पर या डॉक्टर के पास जाकर समय-समय पर अपने ब्लड प्रेशर की जांच करवाने की सलाह देता हूं।
‘‘डॉ अग्रवाल ने हाल के एक अध्ययन का हवाला दिया जिसके मुताबिक मध्य प्रदेश में 15 से 49 साल की आयु वर्ग के 13ः लोग हाइपर टेंशन से पीड़ित हैं। उन्होंने बताया कि स्कूली बच्चें में भी हाइपरटेंशन और मोटापे की समस्याएं अधिक होने लगी हैं। डॉ राजेश अग्रवाल ने कहा, ’’गोली की संख्या उतना मायने नहीं रखती जितना जरूरी होता है ब्लडप्रेशर को जांचना।‘‘
ब्लडप्रेशर का मतलब होता है रक्त वाहिकाओं में बहने वाले रक्त द्वारा वाहिकाओं की दीवारों पर डाला जाने वाला दबाव। मध्य प्रदेश में हाइब्लडप्रेशर मृत्यु और विकलांगता पैदा करने वाला चौथा सबसे प्रमुख कारण है तथा भारत में स्वास्थ्य संबंधी नुकसान पैदा करने वाला चौथा सबसे जोखिम का कारण है ।
डॉक्टरों की सलाह है कि 18 साल के युवा को भी अपने ब्लडप्रेशर की नियमित जांच हर दो साल में कम से कम एक बार अवश्य करानी चाहिए और 40 साल की उम्र के बाद हर साल कम से कम एक बार ब्लडप्रेशर की नियमित जांच करायी जानी चाहिए। हाइपरटेंशन का पता लगने पर नियमित जांच करवाते रहें ताकि आपके डॉक्टर जरूरत के अनुसार दवाओं और उनकी मात्रा में बदलाव कर सकें।
ब्लडप्रेशर किस कारण से होता है, इसकी जानकारी नहीं है और यह सबसे बड़ा खतरे का कारण भी है। उम्र, जीवन शैली, पारिवारिक इतिहास, तनाव वगैरह से हाइब्लड प्रेशर हो सकता है। अगर यह प्रेशर लंबे समय तक बना रहता है तो इसकी वजह से रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है और हृदय पर भी दबाव बढ़ता है। इसके परिणाम स्वरूप हार्टफेल, हार्टअटैक, ब्रेनस्ट्रोक और किडनी तथा आंखों की तकलीफें बढ़ सकतीहैं।
ब्लडप्रेशर का पता लगने पर अपने डॉक्टर की सलाह का अवश्य पालन करें ताकि आपका ब्लडप्रेशर नियंत्रण में रहे और इसकी वजह से पैदा होने वाली जटिलताओं की रफ्तार भी धीमी की जा सके। इसके लिए जरूरी है संतुलित खुराक लेना जिसमें फलों, सब्जियों और साबुत अनाज की मात्रा अच्छी होनी चाहिए, नमक का सेवन घटाएं, हर हफ्ते कम से कम 150 मिनट की सामान्य एरोबिक गतिविधि अवश्य करें, तनाव कम करें, वज़न सामान्य रखें, शराब और तंबाकू सेवन में कमी लाएं तथा डॉक्टर के निर्देशानुसार दवाएं लेते रहें। मरीज़ों को अपने डॉक्टरों के निर्देशों का पालन करना चाहिए और दूसरे मरीज़ों के साथ दवाओं की अदला-बदली नहीं करनी चाहिए।


